जिंदगी एक सफर हैं, जो कभी न कभी रुकेगा ही,
तो क्यों न इस सफर को सुहाना बनाया जाए।
अनेकों लहमे होंगे इस सफर में, कुछ खट्टे कुछ मिटे,
उन्हें अपनाकर क्यो न आगे बड़ा जाए।
सफर में, हर बात मन मुताबिक तो न होगी कभी,
जो हुआ है क्यो न उसे मन से अपनाया जाए।
सभी मुसाफिर है,
सभी को उतरना ही है,
तो क्यो न मुस्कुराते हुए अपनी मंजिल तय की जाए।
कल क्या हो किसने जाना, शायद कल हो ही ना,
तो क्यो न आज को ही यादगार बनाया जाए।
जिंदगी एक सफर हैं, जो कभी न कभी रुकेगा ही,
तो क्यों न इस सफर को सुहाना बनाया जाए।
