हर इंसान पर खुदका, अपनोंका, दूसरोंका, या परिस्थितिका कोई न कोई दबाव होता ही हैं, लेकिन जो इंसान इस दबाव को अच्छी तरह संभालते हुए आगे बढ़ता हैं, उसी का जीवन हीरे जैसा निखरता हैं ।

स्वालंबी बनो। किसीपे बोझ न बनो, न खुदपे न दूसरोंपे।।।

बस ! एक वजह ।

बस! एक वजह ।

वजह हजारों होंगी,
थकने की,
लेकिन कोई तो वजह होगी,
दिल से काम करने की।

वजह हजारों होंगी,
डरने की,
लेकिन कोई तो वजह होगी,
लड़ने की।

वजह हजारों होंगी,
हारने की,
लेकिन कोई तो वजह होगी,
जितने की।

वजह हजारों होंगी,
सबसे दूर रहने की,
लेकिन कोई तो वजह होगी,
सबसे मिलजुल के रहने की।

वजह हजारों होंगी,
मायूस रहनेकी,
लेकिन कोई तो वजह होगी,
खुश रहने की।

वजह हजारों होंगी,
जिंदगी से नाराज़ होने की,
लेकिन कोई तो वजह होगी,
जिंदगी जीने की।

बस! एक वजह ।

Q & A

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Why are we unhappy?

Because we concentrate on things that we don’t have rather than be grateful for whatever we have.

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What do mean by good health ?

Relaxed mind in a Active body means good health.

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Fatty Liver

Fatty liver disease is becoming increasingly common in many parts of the world, affecting many people globally.

Fatty liver occurs when fat accumulation is more than 5% in liver cells. It is normal to have a tiny amount of fat in these cells. Fat accumulation and inflammation damage the liver cells, leading to fibrosis, or scar tissue, as liver cells are repeatedly injured and die off. It increases the risk of other diseases, including heart disease, diabetes, and kidney disease.

Several factors may cause or contribute to developing fatty liver:

  • Obesity;
  • Excess belly fat;
  • Excess belly fat;
  • High intake of refined carbs;
  • Insulin resistance;
  • Sugary beverage consumption.

There may be many symptoms of fatty liver:

  • Loss of appetite;
  • Fatigue and weakness;
  • Nausea and vomiting;
  • Moderate to severe abdominal pain;
  • Yellowing of eyes and skin

One can follow the following steps to get rid of fatty liver :

  • Lose body fat:
  • Avoid overeating;
  • Plan your healthy diet;
  • Diet plan for getting rid of Fatty Liver;
  • Exercise to reduce liver fat;
  • Maintain a healthy weight.
Health Coach

क्षमा

क्षमा का अर्थ है नकारात्मक भावनाओं को सकारात्मक दृष्टिकोण में बदलना। यह दूसरों के लिए भलाई की कामना करने की बढ़ी हुई क्षमता की प्रक्रिया है।

किसी अनचाही घटना के जिम्मेदार व्यक्ति को जिम्मेदारी से मुक्त करना, क्षमा करने वाला कार्य है।

क्षमा बिना शर्त होती हैं; यह बिना किसी अपेक्षा के प्रदान की जाती है और मांगा जाती है। किसी भी रिश्ते में, रिश्ते को बनाए रखने में माफी एक महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है।

मनुष्य गलती करने के लिए प्रवृत्त होता है। क्षमा उन गलतियों पर ध्यान केंद्रित करने में मदद करती है, न कि किसने उन गलतियों को किया। जब हर कोई क्षमा के लिए परस्पर दृष्टि रखता है, तो यह एक लंबे रिश्ते में विकसित होता है।

अध्ययनों से पता चलता है कि जो लोग क्षमा करते हैं वे क्रोध करने वालों की तुलना में अधिक खुश और स्वस्थ होते हैं।

  • जितने अधिक क्षमाशील लोग होते हैं, वे उतनी ही कम बीमारियों से पीड़ित होते हैं। कम क्षमा करने वाले लोगों ने अधिक संख्या में स्वास्थ्य समस्याओं की सूचना दी।
  • क्षमा करने वाले लोग कम क्रोधित होते हैं, कम आहत महसूस करते हैं, अधिक आशावादी, दयालु और आत्मविश्वासी होते हैं।

क्षमा एक विकल्प है, भले ही उस चुनाव को करने में लंबा समय लगे।

प्रक्रिया के दौरान व्यक्ति नकारात्मक भावनाओं को महसूस कर सकता है। जब क्षमा की प्रक्रिया पूरी हो जाती, तब व्यक्ति क्रोध जैसी नकारात्मक भावनाओं की जगह सहानुभूति और करुणा जैसी सकारात्मक भावनाओं को महसूस करता हैं।

क्षमा स्थिति को नया अर्थ दे सकती है। यह बातचीत में सुधार कर सकता है और दोनों लोगों के लिए सुलह को बढ़ावा दे सकता है (एक क्षमा मांगनेवाला और दूसरा क्षमा करने वाला)।

क्षमा के परिणाम, जिनका समग्र कल्याण पर प्रभाव पड़ता है, उनमें शामिल हैं:

  • सकारात्मक सोच की बहाली;
  • रिश्तों की बहाली
  • चिंता में कमी;
  • मजबूत एकाग्रता;
  • आत्म-सम्मान बढ़ाया;
  • आशा की एक बड़ी उम्मीद और;
  • नकारात्मक प्रभाव और लक्षणों में कमी;
  • तनाव से निपटने और राहत पाने की क्षमता में वृद्धि।

सुखी और समृद्ध जीवन के लिए व्यक्ति को क्षमा करने की क्षमता को विकसित और बनाए रखना चाहिए…✍

क्षमा अतीत को नहीं बदल सकती, लेकिन यह भविष्य जरूर बदल देती है ।

Life Coach

न जाने लोग आजकल कैसे रिश्ते निभाते हैं ?

न जाने लोग आजकल कैसे रिश्ते निभाते हैं ?

दूसरोंकी की बाते समझने का प्रयास करते हैं,
लेकिन अपनोको नासमझ समझते हैं।

न जाने लोग आजकल कैसे रिश्ते निभाते हैं ?

दूसरोंकी बड़ी से बड़ी गलती को माफ कर देते हैं,
लेकिन अपनोंकी छोटी गलती को भी जिंदगीभर पकड़के बैठते हैं।

न जाने आजकल लोग कैसे रिश्ते निभाते हैं ?

दूसरोसे हुआ झगड़ा जल्द से सुलझा लेते हैं,
लेकिन अपनोंसे ता-उम्र जंग जारी रखते हैं।

न जाने लोग आजकल कैसे कैसे रिश्ते निभाते हैं ?

दूसरोंकी खुशियोंमे बिन बुलाए भी शरीक हो जाते हैं,
लेकिन अपनोंकि खुशी में बुलाने पर भी जाने से इतराते है।

न जाने लोग आजकल कैसे रिश्ते निभाते हैं ?

जिंदगी आसान नहीं दोस्तो,
पराए कब साथ छोड़ दे समझ न पाओगे।

खून के रिश्ते आखिर खून के रिश्ते होते हैं,
थोडासा संभाल लो तो, जिंदगी भर साथ निभाएंगे ।
जिंदगी भर साथ निभाएंगे।

Relationship Coach

Forgiveness

Forgiveness implies replacing negative emotions with positive attitudes. It is a process of an increased ability to wish good for others, especially for the offender. It is an excusing or pardoning act to release the offender from responsibility for an action or forgetting the incident and the person responsible for it.

Forgiveness is unconditional; it is granted and asked without any expectation. In any relationship, forgiveness plays a crucial role in maintaining a relationship. Humans are prone to make mistakes.  Forgiveness helps to focus on mistakes rather than who committed those mistakes. When everyone has a mutual viewing for forgiveness, then it develops in a long relationship.

Studies show that people who forgive are happier and healthier than those who hold resentments. 

  • The more forgiving people are, the less they suffer from a wide range of illnesses. The less forgiving people reported a more number of health problems.
  • Forgiving people become less angry, feel less hurt, are more optimistic, compassionate, and self-confident. 

Forgiveness is a choice, even if it takes a long time to make that choice. 

One may feel negative emotions during the process. When completed, the person will have replaced negative emotions associated with unforgiveness like anger with positive emotions like empathy and compassion. 

It may give new meaning to the situation. It may improve interactions and promote reconciliation for both people (one asking for forgiveness and the other giving it).

Outcomes of forgiveness that have an impact on overall wellbeing include:

  • Reduction in negative affect and symptoms;
  • Restoration of positive thinking;
  • Restoration of relationships;
  • Reduction in anxiety;
  • Strengthened concentration;
  • Raised self-esteem;
  • A greater sense of hope;
  • Enhanced capacity for conflict management and;
  • Increased ability to cope with stress and find relief.

Forgiveness may not change the past, but it does change the future.

For happy and prosperous life, one must develop and maintain the capacity to forgive…✍

Life Coach

जनसंख्या और उसके विपरित परिणाम ।।।

प्रिय भारतीयों,

मैंने विभिन्न स्रोतों से डेटा संकलित किया है, यह दिखाने के लिए कि किसी भी देश की जनसंख्या उसकी सुख और समृद्धि को प्रभावित करती हैं।

Countries and its population rankingHappiness RankingProsperity RankingPopulationDensity (P/Km2)Land ( Km2)
Finland (116)155,540,72018303,890
Denmark (115)215,792,2023642,430
Switzerland (101)338,65462221939,516
Iceland (181)411341,2433100,250
Norway (119)525,42124115365,268
The Netherlands (69)6617,134,87250833,720
Sweden (91)7410,099,26525410,340
New Zealand (126)874,822,23318263,310
Austria ( 97)9109,006,39810982,409
Luxembourg (169)109625,9782422,590
Canada (39)111437,742,15449,093,510
Australia (55)121628,499,88437,682,300
India (2)1441011,380,004,3854642,973,190
शीर्ष सुखी और समृद्ध देशों की जनसंख्या
*नोट- एक अनुपालन डेटा स्रोत से स्रोत में भिन्न हो सकता है।

उपरोक्त तालिका किसी भी राष्ट्र के विचार करने के लिए कई तथ्यों को दर्शाती है। यदि आप दुनिया के सबसे खुशहाल देशों और समृद्ध देशों की सूची देखें, तो आपको सूची के शीर्ष पर लगभग एक जैसे ही नाम मिलेंगे। इससे सिद्ध होता है कि सुख ही समृद्धि लाता है।

हमारा भारत Happiness index में 144वें और Prosperity index में 101वें स्थान पर है। इसके पिछड़ने का मुख्य कारण इसकी अधिक जनसंख्या – 1,380,004,385 है। जनसंख्या की दृष्टि से यह दूसरे स्थान पर है। क्षेत्रफल की दृष्टि से यह सातवां और सर्वाधिक घनी आबादी वाले देशों में 22वां देश है।

यदि आप तालिका का विश्लेषण करते हैं, तो आप पाएंगे कि इष्टतम जनसंख्या वाले देश उपरोक्त सूची में सबसे ऊपर है।

किसी भी राष्ट्र के सुख-समृद्धि में जनसंख्या की महत्वपूर्ण भूमिका होती है। इष्टतम जनसंख्या वाले देश अधिक समृद्ध और खुशहाल हैं।

किसी भी देश की इष्टतम जनसंख्या कई तथ्य निर्धारित करती है:

— प्रति व्यक्ति आय अधिक है;
— यह सुनिश्चित करता है कि देश के प्रत्येक नागरिक को सरकार से पर्याप्त मात्रा में लाभ मिले;
— यह सभी के लिए रोजगार की आश्वासन देता है;
— सभी के लिए पर्याप्त आवास और कृषि भूमि उपलब्ध होती हैं;
— यह सुनिश्चित करता है कि सभी सेवाएं जैसे – परिवहन, सुरक्षा, बिजली, पानी, चिकित्सा, स्वास्थ्य प्रत्येक नागरिक के लिए उपलब्ध हों।

अधिक जनसंख्या राष्ट्रीय अर्थव्यवस्था और संसाधनों पर एक बोझ है।

भारत के लिए बढ़ती जनसंख्या को नियंत्रित करने के लिए सुधारात्मक कदम उठाने का यह सही समय है; यह अपनी आर्थिक और जीडीपी वृद्धि को गति देगा…✍️

एक भारतीय ।।।

सुख-दुख

सुख-दुख हर जीवन के मौसम है,
जो आते जाते रहते है।

कभी कभी सुख-दुख अकेले ही आते है, पर कभी मिलके, दरवाजा खटखटाते हैं।

चाहे हम कितनी ही कोशिश क्यों न कर ले,
सुख-दुख तो आते ही रहेंगे।

डरेंगे जितना ज्यादा हम दुख से, उतना ही, वो हमे डराएगा।

बुलाएंगे जितना सुख को,
उतना ही, वो अकड़ दिखायेगा।

फिर क्यों न इन्हे एक समान मान,
जो आया, उसे मुस्कुराते हुए अपनाए।

आओ दोस्तो,
सुख में भी,
और दुख में भी,
खुशियां मनाएं, खुशियां मनाएं।।।

Life Coach

समुपदेशन – काळाची एक गरज

आजच्या व्यस्त जगात लोक त्यांच्या जीवनशैलीमध्ये खूपच व्यस्त आहेत. यामुळे त्यांच्या जीवनात तणाव वाढतो आणि अशा प्रकारे त्यांचे वैयक्तिक आणि व्यावसायिक जीवनात अडचणीत येतात. तथापि, हा तणाव कमी करण्यासाठी ते बरेच प्रयत्न करतात सुद्धा, परंतु सर्व व्यर्थ. काही वर्षांनंतर, धकाधकीचे जीवन जगण्याची एवढी सवय होते की ती त्यांची जीवनशैली बनते.

या प्रकारच्या जीवनशैलीची अनेक कारणे आहेत, परंतु प्रमुख म्हणजे भावना दडपून किंवा लपून ठेवणे होय. लहानपणापासूनच, बरेच लोक समाजातील मानकांचा सामना करण्यासाठी त्यांच्या भावना दडपतात. थोड्या वेळाने, त्यांना त्यांची भावना ओळखनेच अवघड होऊन बसते. काहीजणांची भावना ठामपणे व्यक्त करण्याची क्षमता मंदावते.

साथीच्या रोगाने स्थिती आणखी अवघड बनवली आहे. लॉकडाऊनमुळे लोकांना कामाऐवजी स्वत: आणि कुटुंबासमवेत जास्तीत जास्त वेळ घालवावा लागत आहे. आपल्याच भावनाविषयी माहिती नसणे किंवा त्याबद्दल अभिज्ञ असल्यामुळे काही लोकांना स्वत: आणि कुटुंबातील सदस्यांसह खूपच असुरक्षित वाटत आहे. यामुळे लॉकडाऊनमध्ये घरगुती हिंसाचारत वाढ होत आहे.

लपलेल्या गोष्टी नेहमी असुरक्षिततेची आणि भीतीची भावना निर्माण करतात. जेव्हा एखाद्याला त्यांच्या भावना आणि वागण्याविषयी माहिती नसते, तेव्हा त्याच गोष्टींची अधिक भीती वाटते. तसेच, एखादी गोष्ट जास्त दडपलेल्या स्थितीत असेल तर कधीतरी त्याचा उद्रेक होणे निश्चित आहे. हे दडपलेल्या भावनांसाठीही लागू होते.

समुपदेशन त्या दडपलेल्या भावना मोकळे करण्यास किंवा त्या लपलेल्या भावना जाणून घेण्यास मदत करते. एकदा एखाद्यास त्यांची माहिती झाली की भावनांचे चांगल्या पद्धतीने व्यवस्थापन करता येते. हे भावनिक बुद्धीमत्ता वाढविण्यास ही मदत करते.

समुपदेशकाशी बोलण्यामुळे राग, अपराधीपणाची भावना आणि गोपनीय वातावरणात भीती यासारख्या भावना व्यक्त करण्यास संधी मिळते.

समुपदेशन दीर्घकालीन शारीरिक आरोग्य समस्या, नोकरी गमावणे, घटस्फोट, आघात आणि अशा अनेक मानसिक आरोग्याच्या समस्यांसह आयुष्यातील अनेक घटना हाताळण्यास मदत करू शकते. शक्यतो, वेगळ्या दृष्टिकोनातून परिस्थिती अधिक स्पष्टपणे पाहण्यास मदत करणे हे समुपदेशनाचे एक उद्दीष्ट आहे…✍️

समुपदेशक